पूछ रहा है हिन्दुस्तान ये कैसा हिन्दुस्तान है
ये कैसा हिन्दुस्तान है ये कैसा हिन्दुस्तान है
भ्रष्टाचार,अत्याचार,अनाचार,व्याभिचार गूँज रहा है
देश के शाषकों द्वारा ही जनता का शोषण हो रहा है
कभी मंहगाई से कभी बेरोज़गारी से आम आदमी परेशान है
कहीं किसान अपनी ही ज़मीन छीने जाने से हैरान है
दिल्ली धमाकों के समय माननीय मंत्री फैशन शो देखते हैं
पूछने पर धमाके पर कहते हैं की वो तो इससे अनजान है
देश की सत्ता जाने कैसे और किस दिशा में चल रही
देश के लिए कम घोटालों के लिए अधिक काम कर रही
राजनीति अपनी मर्यादा से बिलकुल च्युत हो चुकी है क्यूंकि उनकी मर्यादा तो स्विस बैंकों में जमा हो चुकी है
मेहनतकश मजदूर क्या जोड़े,क्या खाए परेशान है
पूछ रहा है हिन्दुस्तान ये कैसा हिन्दुस्तान है
सुलग रही वर्षों से जम्मू की धरती आतंक की आग में
अरुणाचल में भी आतंक पसर रहा चीन की छाँव में
कहीं नकली नोटों का कारोबार कहीं तस्करी नशे की
डरा रहता है जनमानस जाने कब सुनले खबर बम फूटने की
शराब,जुए व वेश्यावृत्ति समाज को खोखला बनाते जा रहे
शिक्षा का मानक कैसे उठे जब शिक्षा को भी व्यवसाय मान रहे
सच्चाई की आवाज़ गर उठती भी है तो दबा दी जाती है
बेईमानी के खिलाफ बोलने वालों को ही बेईमानी की सजा दी जाती है
बाहुबलियों,गुंडों,अराजकतत्वों को चुनाव के लिए सीट मिलती है
इस तरह से अन्याय आतंक के तले बेचारी जनता जी रही है
मीडिया नहीं दिखा पाती गंगापुत्र निगमानंद का बलिदान है
पूछ रहा है हिन्दुस्तान ये कैसा हिन्दुस्तान है
राजनीति में आज सबकुछ है बस नीति नहीं
शरीफ आदमी को ये ज़रा भी भाति नहीं
अच्छा नेता शब्द जैसे शब्दकोष में नहीं रहा
जनता का भी मन वोट राजनीति में भटक रहा
कौन बदले तस्वीर इस गन्दी राजनीति की
कौन जुटाए साहस आज के नेताओं से लड़ने की
जिस जनता से वोट पाते उसे ही सताते नेता हैं
हम हैं तेरे भगवन कहते ये दागी नेता है
राजनीति को हर कीमत पर चाहिए काबिल इंसान है
शरीफ आदमी को ये ज़रा भी भाति नहीं
अच्छा नेता शब्द जैसे शब्दकोष में नहीं रहा
जनता का भी मन वोट राजनीति में भटक रहा
कौन बदले तस्वीर इस गन्दी राजनीति की
कौन जुटाए साहस आज के नेताओं से लड़ने की
जिस जनता से वोट पाते उसे ही सताते नेता हैं
हम हैं तेरे भगवन कहते ये दागी नेता है
राजनीति को हर कीमत पर चाहिए काबिल इंसान है
पूछ रहा है हिन्दुस्तान ये कैसा हिन्दुस्तान है





