Thursday 13 October 2011

द्रष्टान्त


एक आदमी के तीन बेटे थे
। वो उनमे नेक जीवन जीने की इच्छा भरना चाहता था। इसके लिए वो उनमे अच्छी आदतें डालने व बुरी आदतों से बचने के लिए कहता रहता और क्रियात्मक रूप से उन्हें सिखाता भी था।परन्तु जैसे जैसे उस आदमी की आयु बढ़ने लगी उसने देखा की उसके बताये सन्मार्ग से उसके बेटे भटक रहे हैं एक एक करके उनमे बुरी आदतें आती जा रही हैं सच्चाई के सामने झूठ बोलना अधिक आसान था,कहीं शर्त लगन कहीं जुआ खेलना और ग़लत व्यसन भी अपना रहे थे

एक दिन पिता अपने तीनो बेटों को अपने बगीचे में ले गया वहां भाति भाति आकार व नाप के पौधे झड़ी झंखाड़ व वृक्ष थे

अपने सबसे छोटे बेटे से उसने कहा,''कृपया इस अंकुर को उखाड़ दो
।''
युवक ने तुरंत ही सहजता से उस अंकुर को ज़मीन से उखाड़कर अपने पिता को पकड़ा दिया


फिर उसने अपने दुसरे बेटे से कहा क्या तुम इस झड़ी को उखाड़ सकते हो ?


दूसरे बेटे ने पहले एक हाथ से फिर दोनों हाथों से उस झाड़ी को उखाड़ने की कोशिश की काफी प्रयत्न करने के बाद उसने झाड़ी तो निकाल दी पर उसे भी थोड़ी चोट आई

अब पिता ने अपने सबसे बड़े बेटे से कहा, "क्या तुम मेरे लिए यह पेड़ उखाड़ सकते हो ?"
बेटे ने पेड़ को देखा और कहा,"यह पेड़ ज़मीन में बड़ी मजबूती से लगा हुआ है इसकी जड़ें इतनी मजबूत है की काफी प्रयत्न करने के बाद भी मैं इसे उखाड़ नहीं सकता
।"
फिर पिता ने अपने बेटों से कहा मैं तुम लोगों को एक महत्त्वपूर्ण पाठ पढ़ाने के लिए इस बगीचे में ले कर आया हूँ। जब एक आदत तुममे पनप रही अवस्था में होती है, जब तक इसने तुम्हारे मन में जड़ें नहीं जमा लीं उन्हें निकालना तुम्हारे लिए आसान होगा ।किन्तु एक बार इसकी जड़ों ने मजबूती पकड़ ली तो उन्हें छोड़ना तुम्हारे लिए असंभव हो जायेगा।कौन सी आदत अच्छी है कौन सी बुरी ये हमारा अंतर्मन पहले ही बता देता हैइसलिए किसी भी बुरे विचार रुपी अंकुर को आदत रुपी वृक्ष बनाने से पहले उसे रोक दो। 




'आत्मिक-पोषण' पुस्तक से संकलित

6 comments:

  1. सार्थक सन्देश देती हुई पोस्ट

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  2. सच है ....बुरी आदत से जड़ें ज़माने के बाद छुटकारा मुश्किल है....

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  3. अच्छी और सच्ची बात ....

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  4. सुनील जी,मोनिका जी और चैतन्य जी आप सभी को पोस्ट पढने के लिए आभार
    धन्यवाद

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  5. अनुपमा जी,धन्यवाद

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