Friday 14 October 2011

हर मज़हब मानवता सर्वोपरि बताता है



हर मज़हब मानवता सर्वोपरि बताता है
हर मज़हब मानवता की राह दिखाता है 

है सबका मालिक एक ईश्वर कहो या अल्लाह 
घट घट में बसता है वो गाड कहो या निरंकार 

हर मज़हब अहिंसा ही धर्म सिखाता है 
हर मज़हब मानवता सर्वोपरि बताता है

हर धर्मग्रन्थ सदगुणों सद्विचारों की खान है
उन्हें जीवन में उतारना ही उनका सम्मान है 

सतसंग ही अंतःकरण को चमकाता है 
हर मज़हब मानवता सर्वोपरि बताता है

4 comments:

  1. बहुत बढ़िया |
    बधाई ||
    http://dineshkidillagi.blogspot.com/

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  2. रविकर जी,दिव्या जी और मृदुला जी रचना को पढने और सराहने के लिए आभार
    धन्यवाद

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